स्वास्थ्य विभाग सोया हुआ है कुंभकर्णी नींद, सीएमएस इडी व आयुर्वैदिक के रजिस्ट्रेशन पर धडेले से प्रयोग कर रहे हैं एलोपैथिक दवाइयां
नगीना तहसील के शहरों व ग्रामीण क्षेत्र में धडेले से अवैध क्लिनिक व अवैध अस्पताल संचालित हो रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग अपना कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। आए दिन किसी न किसी क्लीनिक या अस्पताल पर किसी व्यक्ति की मौत की सूचना अखबारों की सुर्खियां बटोर रहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग सब कुछ जानकार भी अनजान बना हुआ है। कुछ झोलाछाप अवैध क्लिनिक वालों ने अपनी दुकान के ऊपर बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर लोगों को गुमराह कर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। और सीएमएस इड व आयुर्वेदिक के रजिस्ट्रेशन पर धडेले से एलोपैथिक दवाइयां का प्रयोग कर रहे हैं। कुछ नवयुवकों ने हो तो फार्मा क्लीनिक के नाम से भी अपनी दुकान चला रखी है। और कुछ ऐसे व्यक्ति भी अवैध क्लीनिक चला रहे हैं। जिन पर आपराधिक मुकदमे भी दर्ज है। लेकिन पुलिस या स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन झोलाछाप डॉक्टर या अवैध क्लिनिक पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। मेडिकल स्टोर से ज्यादा दवाइयां अवैध क्लिनिक की दुकानों में भरी हुई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ अवैध क्लिनिक की दुकानों पर प्रतिबंधित दवाइयां का भी भंडारण भरा हुआ है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन अवैध क्लिनिक व अवैध अस्पतालों पर कोई भी कार्यवाही नहीं की जा रही है। जो क्षेत्र में चर्चा बनी हुई है की क्या इन अवैध क्लिनिक या झोलाछाप डॉक्टरों पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई कार्रवाई की जा सकती है। या फिर यूं ही झोलाछाप या अवैध अस्पताल वालों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभयदान दिया जाएगा। या स्वास्थ्य विभाग की थी की मौत का इंतजार कर रहा है कि कब किसी क्लीनिक पर किसी व्यक्ति की मौत हो जाए किसी व्यक्ति की मौत होने के बाद स्वास्थ्य विभाग सिर्फ खाना पूर्ति करके अपना पल्ला झाड़ लेते हैं फिर बाद में खेल शुरू होता है दलालों का मौत होने के बाद कुछ दलाल प्रवृत्ति के लोग अस्पताल और मृतक के परिजनों में समझौता करा कर मामले को रफा दफा कर देते हैं।
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